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Chhattisgarh: रावघाट से तकनीकी ट्रायल के तहत भिलाई पहुंची लौह अयस्क की पहली खेप, स्टील प्लांट में हुआ स्वागत

Chhattisgarh News: देश के सबसे बड़े लौह अयस्क भंडारण में से एक रावघाट परियोजना की शुरुआत हो चुकी है. रावघाट लौह अयस्क खदान खोलने को लेकर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) और भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के बीच कई वर्षों से कवायद की जा रही थी. रावघाट परियोजना के अंतर्गत लौह अयस्क खदान को खोलने का सैकड़ों ग्रामीण भारी विरोध कर रहे थे. हाल ही में ग्रामीणों की सहमति मिली थी. अंजरेल से उत्खनन किए लौह अयस्क की पहली खेप आज भिलाई स्टील प्लांट पहुंची. तकनीकी ट्रायल के रूप में अंतागढ़ तक रेलमार्ग से लौह अयस्क भिलाई स्टील प्लांट लाया गया. रावघाट खदान से भिलाई स्टील प्लांट तक लौह अयस्क की आपूर्ति के लिए लंबे समय से प्रयास किया जा रहा था.

रावघाट से भिलाई पहुंची लौह अयस्क की पहली खेप 

छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी परियोजना के तहत रावघाट लौह अयस्क खदान क्षेत्र के एफ ब्लॉक के अंजरेल क्षेत्र में दिसंबर 2021 से भिलाई स्टील प्लांट ने लौह अयस्क माइनिंग का काम शुरू किया है. लौह अयस्क को भिलाई स्टील प्लांट तक लाने के लिए रेल लाइन भी बिछाई गई, हालांकि रेल लाइन अभी अंतागढ़ तक पहुंच गयी है और अंजरेल खदान तक रेल लाइन बिछाए जाने की कवायद जारी है. परियोजना के तहत अंजरेल से उत्खनन किए गए लौह अयस्क की पहली खेप का तकनीक ट्रायल लेते हुए ट्रकों के जरिए सड़क मार्ग से अंतागढ़ स्टेशन तक पहुंचाया गया. अंतागढ़ स्टेशन मालवाहक ट्रेन के जरिए भिलाई स्टील प्लांट तक लाया गया. अंतागढ़ से भिलाई तक लौह अयस्क की पहली खेप लाने के स्वागत में मुख्य महाप्रबंधक तापस दास गुप्ता (रावघाट माइंस )और मुख्य महाप्रबंधक समीर स्वरूप (लौह) के साथ ही अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. उन्होंने पहली लौह अयस्क की खेप लेकर पहुंची ट्रेन का स्वागत किया.

रावघाट की पहाड़ियों में है सबसे ज्यादा लौह भंडार

पूरे भारत में सबसे ज्यादा लौह भण्डारण नारायणपुर स्थित रावघाट की पहाड़ियों में मापी गई है. छतीसगढ़ में बैलाडीला की पहाड़ियों के बाद सबसे अधिक लौह भण्डारण रावघाट की पहाड़ियों  में है. बैलाडीला की पहाड़ियों में लौह भण्डारण 1.342 अरब टन आंका गया है. अकेले नारायणपुर रावघाट पहाड़ियों में लौह भण्डार 731.93 मिलियन टन का अनुमान है. स्टील ऑथिरिटी ऑफ इंडिया और भिलाई स्टील प्लांट के जरिए रावघाट की पहाड़ी का खनन किया जाना है. उत्खनन के साथ साथ दल्ली राजहरा जगदलपुर रेल लाइन परियोजना भी रावघाट रेल परियोजना का हिस्सा है, जिसे दो भागों में विस्तार किया गया है. एक भाग दल्लीराजहरा से रावघाट तक रेल लाइन बिछा ली गई है. इसका फायदा क्षेत्रवासियों को मिल रहा है. रावघाट क्षेत्र से लौह अयस्क का उत्खनन और भिलाई तक लाने के लिए दल्ली राजहरा से नारायणपुर तक और नारायणपुर से जगदलपुर तक की रेललाइन परियोजना सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र और भारतीय रेलवे के माध्यम से जारी है. परियोजना के तहत दल्ली राजहरा से अंतागढ़ तक की 60 किलोमीटर लंबी रेललाइन का काम पूरा हो चुका है और इसके आगे का कार्य तेज गति से जारी है. अब रेल लाइन को बढ़ाकर नारायणपुर और जगदलपुर तक पहुंचाये जाने का इंतजार बस्तरवासियों को बेसब्री से है.

हर साल 3 टन लौह अयस्क का हो सकेगा उत्खनन 

भिलाई इस्पात संयंत्र ने रावघाट क्षेत्र में 3 लाख टन हर साल लौह अयस्क के उत्खनन और निर्गमन की सभी जरूरी अनुमति लेकर आज अंतागढ़ से 21 वैगन की प्रथम रैक को लोड किया और भिलाई के लिए रवाना किया. अंतागढ़ रेलवे स्टेशन से भिलाई इस्पात संयंत्र तक 150 किलोमीटर की यात्रा कर पहली खेप आज भिलाई पहुंची है. अंजरेल से उत्खनन किये गये लौह अयस्क में 62 प्रतिशत तक आयरन (एफई) की मात्रा है. लौह अयस्क से भिलाई इस्पात संयंत्र की उत्पादन की लागत में कमी आयेगी और देश के विकास में और अधिक योगदान मिलेगा. अंतागढ़ में लौह अयस्क का परिवहन को ध्यान में रखते हुए स्टेशन के नजदीक एक वे ब्रिज और स्टाक यार्ड का निर्माण भी किया गया है. माना जा रहा है कि रावघाट लौह अयस्क खदान से परिवहन ट्रेन के जरिए शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और प्लांट के माध्यम से होने वाले मुनाफे का कुछ प्रतिशत नारायणपुर और बस्तर जिले के विकास में लगाया जाएगा.

 

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